Sunday, June 11, 2017

मोबाइल चोरी के पीड़ित इस्माइल के लिए बंगाल में AIMIM ने किया प्रदर्शन

Posted by Unknown

आज बंगाल के पुरबा मेदानीपुर सदर तमलुक कागेछिया गाँव मे AIMIM कार्यकर्ताओं ने किया प्रशासन के विरोध में रैली

जिसमें मोजूद रहे
अनवर हसन पासा अबु कासिम डॉक्टर अफताब आलम डॉक्टर रफीक मुरशीद भाई
रिजवान बागी रुस्तम खान और MIM के सैकड़ों कार्यकर्ता

4.6.2017  को इसमाइल नाम के 11 वर्षीय मुस्लिम बच्चे को कुछ लोगों ने मिलकर चोरी के इंजाम में उसका हाथ और लिंक काट दिए थे क्लब में ले जाकर और उस बच्चे का लास गायब कर दिया गया है उसी के विरोध में   Aimim के सीनियर लीडर अनवर हसन पास प्रशासन से रिक्वेस्ट किये थे 24 घंटे के अंदर कातिलों को पकड़ा जाए और उनको कड़ी से कड़ी दंड दिया जाए नहीं तो हम पूरे बंगाल में आंदोलन करेंगे

लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ प्रशासन खामोश है जनता आवाज लगा रही है सरकार बहरी हो चुकी है आज उसी के विरोध में एक रैली निकाला गया प्रशासन की तरफ से जवाब मिला है 3 दिन के अंदर हर हाल में गिरफ्तार कातिलों को किया जाएगा

अनवर हशन पाशा ने कहा है अगर गिरफ्तार नहीं किया जाता है तो मजलिस के कार्यकरता 3 दिन बाद फिर से भारी तादात में आंदोलन करेंगे अब की बार करीब 100000 लोगों के साथ में
आंदोलन किया जाएगा अनवर हसन पापा और मजलिस के कार्यकर्ताओं के कयादत में

Read More
what is Fikar-E-Millat

Janne ke Liye Click Karen.

Monday, May 8, 2017

पुलिस में मुसलमानों के लिए जगह क्यूँ नही जवाब दे कांग्रेस सपा बसपा व अन्य पार्टियाँ

Posted by Hakeem Danish
No automatic alt text available.

महाराष्ट्र प्रदेश बनने के बाद से अब तक
सिर्फ साढ़े चार साल शिवसेना और बीजेपी की मिली
जुली सरकार रही है।अब भी भाजपा शिव सेना की है इसके बावजूद महाराष्ट्र पुलिस में
मुसलमानों की नुमाइंदगी सिर्फ एक फीसद है। दिल्ली में
कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार मुसलसल अपना
तीसरा टर्म पूरा की अब केजरीवाल हैं इसके बावजूद दिल्ली
पुलिस में मुस्लिम नुमाइंदगी सिर्फ पौने दो फीसद है।
पुलिस में मुसलमानों की भर्ती ना होने के लिए
जिम्मेदार कौन है, फिरकापरस्त ताकतें या #कांग्रेस?
यह सवाल अब हर तरफ बड़ी शिद्दत से पूछा जा रहा है
लेकिन इसका जवाब देने के लिए कोई तैयार नहीं है।
नेशनल क्राइम रिकार्डस ब्योरो ने जो आदाद ओ शुमार
(आंकड़े) पेश किए हैं उसके मुताबिक जम्मू कश्मीर और
आंध्रा प्रदेश को अलग कर दिया जाए तो भारत
में जितने पुलिस वाले हैं उनमें मुसलमानों की नुमाइंदगी
तीन फीसद से भी कम है। जम्मू कश्मीर पुलिस में साठ
फीसद और आंध्रा प्रदेश पुलिस में दस फीसद मुसलमान हैं।
उत्तर प्रदेश जहां पिछले तेइस सालों से घूम फिर कर
बहुजन समाज पार्टी और मुलायम सिंह की समाजवादी
पार्टी की सरकारें रही हैं वहां भी पुलिस में मुस्लिम
नुमाइंदगी पौने पांच फीसद ही है। जम्मू कश्मीर पुलिस
में साठ फीसद मुसलमान और आंध्रा प्रदेश में दस फीसद
मुसलमान इन दो प्रदेशों की वजह से ही मुल्क भर की
पुलिस में मुस्लिम नुमाइंदगी का औसत तकरीबन छः फीसद
तक पहुंचता है। इस सूरतेहाल से ही अंदाजा लगाया जा
सकता है कि पूरे मुल्क में मुसलमानों के साथ ज्यादतियां
क्यों होती हैं और मुल्क में मुस्लिम आबादी के तनासुब
(अनुपात) के मुकाबले तकरीबन चार गुना मुसलमान जेलों
में क्यों सड़ाए जा रहे हैं ?
दिल्ली में कमिश्नर से सिपाही तक पुलिस वालों की कुल
तादाद तिरासी हजार है। इनमें मुसलमानों की तादाद
एक हजार पांच सौ इक्कीस (1521) ही है। जो तकरीबन
1.8 फीसद होता है। यह तो माना जा सकता है कि
आईपीएस और पीपीएस के इम्तेहान में पास होकर
मुसलमान भले ही इन नौकरियों में ना पहुंच सकते हो
लेकिन सिपाही बनने लायक तो मुसलमानों मे एक बड़ी
तादाद मौजूद है। सिपाहियों में भी अगर मुसलमानों की
भर्ती नहीं होती तो इसका सीधा मतलब है कि पुलिस
में भर्ती के वक्त मुसलमानों के साथ नाइंसाफी और
बेईमानी की जाती है।
भारत सरकार का खुद का यह हाल है कि बरसों पहले
1978 से दिल्ली में पुलिस कमिश्नर सिस्टम नाफिज है।
आज तक कमिश्नर या स्पेशल कमिश्नर के
ओहदों तक किसी मुसलमान अफसर को नहीं पहुंचने दिया
गया। दिल्ली पुलिस सीधे मरकजी होम मिनिस्ट्री के
मातहत काम करती है। कांग्रेस की कयादत में बनी
यूपीए हुकूमतों के दौरान और उससे पहले कोई कांग्रेसी
लीडर होम मिनिस्टर ही रहा है। इसके बावजूद मुल्क के
किसी मुस्लिम आईपीएस अफसर को दिल्ली का पुलिस
चीफ नहीं बनाया गया, क्या इसके लिए भी
फिरकापरस्त ताकतें जिम्मेदार हैं या फिर #कांग्रेस ??

नोट:इन आकड़ों में कुछ कम ज़्यादा हो सकता है
तो मेहरबानी करके अपना दिमाग वहां ना लेजाकर
सवाल का ज़वाब देने की कोशिस करें। बेहतर होगा



Read More

सभी मसलक के उलेमा आए एक मंच पर, की मुस्लिम हुकुक की बातें और दिए शांति के पैगाम

Posted by Unknown
झारखंड के जमशेदपुर में रविवार की शाम बेहद खास थी जब एक ही मंच को हर मकतब-ए-फिक्र के उलेमाओं ने साझा किया और देश में मुसलमानों के साथ हो रहे बर्बरता पर अपनी अपनी बातें रखते हुए एक शांतिपूर्ण महासभा का सफल आयोजन किया।


दरअसल मुसलमानों को मोत्तहिद करने के लिए जमशेदपुर में "मुस्लिम एकता मंच" का गठन किया गया है जिसमें तमाम मसलक के उलेमा हजरात मिलकर क़ौमी फिक्र को अंजाम दे रहे हैं, इसी के तहत मुस्लिम एकता मंच ने रविवार 7 मई की शाम को जमशेदपुर स्थित गाँधी मैदान में एक इंसाफ महासभा का आयोजन किया, इससे पहले बजरंगदल द्वारा इस महासभा के आयोजन पर रोक लगाने के कई प्रयास किए जा चुके थे लेकिन उलेमाओं और इंसाफ महासभा के वाॅलेंटियर बाबर खान, फिरोज खान, शेख फरीद इत्यादी की जमीनी मेहनत रंग लाई और इंसाफ महासभा को जमशेदपुर उपायुक्त की हरी झंडी मिली।

इस महासभा में तमाम मसलक के उलेमाओं समेत जमशेदपुर और इसके आसपास के लगभग 60 हजार से अधिक लोग गाँधी मैदान पहूंचे, जैसे मानो एक जन सैलाब उमड़ पड़ा था, सभी के हाथों में तिरंगा था, स्टेज भी राष्ट्र ध्वज की तरह सजी थी, गंगा जमुना संस्कृति को दर्शाते सड़कों के किनारे  दुकानदार और बहुसंख्यकों की भीड़ भी काफी तादाद में थी, इसके बाद उलेमाओं की तकरीर शुरु हुई, जिनमें निम्न बातें कहीं गई।


- मुस्लिम युवाओं को आतंक से जोड़कर देखा जाता है। गोहत्या के आरोप में हमले हो रहे हैं। जो मुजरिम हैं उसे सूली पर चढ़ा दो, लेकिन हर मुसलमान को दाउद न समझा जाए।
- जंग-ए-आजादी में मुसलमानों ने भी कुर्बानी दी है। इस्लाम अमन का संदेश देता है, इसलिए किसी भी सूरतेहाल में युवा हिंसा की राह पर न जाएं। और सरकार हमें आतंकवाद की नजर से न देखें, हम अपने वतन के रखवाले हैं।



- मुसलमानों का डीएनए भारतीय मूल का है, चाहो तो इसे टेस्ट करा लें।
- हम हिंसा से परे कानुन को तरजीह दी है, हमें देश के न्याय प्रणाली पर विश्वास है, परंतु आए दिन मुसलमानों के प्रति दोहरी नीति इसकी विश्वसनीयता को खोखली कर रही है।
- आजादी में हमने बढकर बहाया है खुन, अधिकारों में कटौती मंजुर नहीं।
आज भले ही हम उलेमाओं को लाख बुरा-भला कह लें, लेकिन सच यही है की आज भी क़ौम की ख़िदमात जो वो लोग कर रहे हैं उसकी मिसाल नही मिलती, जमशेदपुर इसका जीता-जागता उदाहरण है,
इस महासभा ने उस वक्त सबका ध्यान आकर्षित किया जब तमाम मसलक के उलेमाओं समेत सभी लोगों ने मगरिब की नमाज़ एक ही मैदान में कंधे से कंधा मिलाकर पढ़ा, और मुल्क के अमन-ओ-सुकुन के लिए दुआएं माँगी ,  और फिर हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों से पुरा मैदान गुंजने लगा।
बेशक यह एक सराहनीय प्रयास है कौम को फिरकापरस्ती से दुर एक सही राह दिखाने की, मोत्तहिद होकर अपने हुकुक के लिए आवाज़ बुलंद करने की, ये एक सदा है जो केवल जमशेदपुर तक सीमित नहीं रहनी चाहिये बल्कि इसकी गुँज देश के कोने-कोने तक पहुंचनी चाहिए ताकि हम मुसलमान एक हो जाएँ, इंशाअल्लाह उलेमाओं की यह मेहनत जरुर रंग लाएगी।
- अशरफ हुसैन
Read More

Forbes की 100 ताक़तवर औरतों में 6 मुस्लिम औरतें

Posted by Hakeem Danish
Image may contain: 1 person, screen, hat, close-up and indoor


क्या आप जानते हैं कि मशहूर मैगज़ीन Forbes ने 2016 में अपनी '13th annual World’s 100 Most Powerful Women' की लिस्ट जारी की थी उन 100 शक्तिशाली औरतों में 6 मुस्लिम औरतों ने अपनी बा-वक़ार मौजूदगी दर्ज कराई थी ?
और ख़ुशी की बात यह है कि फोर्ब्स के अनुसार 2005 के मुक़ाबले ताक़तवर महिला मुस्लिम लीडर्स की तादाद 2016 तक दोगुनी हो गयी है !

1. इन 100 ताक़तवर मुस्लिम औरतों में 36 वां नंबर बांग्लादेश की प्रधान मंत्री शेख हसीना वाजेद का है, इसे पिछली बार उनकी रैंकिंग 59 वीं थी !






















2. 43 वे नंबर पर हैं UAE की सहिष्णुता मंत्रालय की पहली महिला राज्य मंत्री (Minster of State for Tolerance) शेखा लुबना अल क़सीमी !


Image may contain: 1 person, close-up and text







3. 65 वे नंबर पर हैं सऊदी अरब की बिजनेस वुमन लुबना एस ओलायन, लुबना सऊदी अरब स्थित ओलायन ग्रुप की चीफ हैं,
टाइम पत्रिका ने भी इन्हे 2005 में दुनिय की ताक़तवर मुस्लिम औरतों में शामिल किया था !

Image may contain: 1 person

4. 91 नंबर पर हैं दुबई की बिजनेस वुमन और Easa Saled Al Gurg Group की मैनेजिंग डायरेक्टर रज़ा ईसा अल गुर्ग, वो अरब महिलाओं की आत्म निर्भरता और सशक्तिकरण के लिए जानी जाती हैं, पिछले साल उनकी रैंक 97 वीं थी !

Image may contain: 1 person, screen, hat, close-up and indoor

5. 96 नंबर पर हैं मॉरीशस की पहली मुस्लिम महिला प्रधान मंत्री और विश्व विख्यात साइंटिस्ट अमीना गरीब फाकिम !

Image may contain: 1 person
6. 37 वे नंबर पर हैं इंडोनेशिया की सिरि मुलयानी इंद्रावती जो कि 1 जून 2010 से 27 जुलाई 2016 तक वर्ल्ड बैंक की मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुकी हैं, और इसके साथ साथ उन्होंने इंडोनेशिया में फाइनेंस मिनिस्टर भी रही हैं !
Image may contain: 1 person, standing and text


source :-
Read More

Sunday, May 7, 2017

मिल्लत मदद जन कल्याण समिति द्वारा नि.शुल्क होम्योपैथिक मेडिकल केम्प

Posted by Hakeem Danish

राजधानी के नवाब कलोनी इलाके मिल्लत मदद जन कल्याण समिति के वार्ड न.77 की टीम द्वारा नि.शुल्क होमियोपेथीक मेडिकल केम्प लगाया गया जिस मे बस्ती के करीब दो सो लोगो ने सेवा का लाभ उठाया !
वार्ड के अध्यछ मो सरफराज़ अली एवं उनकी टीम के मेंबर मो. आसिफ मो. शाहबर मो.सद्दाम  लगातार अपनी टीम के साथ छेत्र मे सामाजिक कार्य करते रेहते हे
ईस मोके पर   मो.नदीम ,  डा आक़ील खान,  मो.सईद , शाह्बाज़.अली , मो. आसिफ खान , मो.शाहीद , अकरम अहमद , सरफराज़.अली मो.शाहिद साहित समिति के तमाम ज़िम्मेदार व मेम्बर मौजूद रहे !
अंत: मे समिति के उपाध्यछ डा आकील खान ने तमाम डॉक्टर व साथियो का शुक्रिया अदा किया और बताया की आने वाले समय मे शहर मे कई जगाह इस तरह के केम्प लगाए जाइंगे !!
अध्यछ
मो. नदीम
मो:न: 8236866870

सचिव
मो. सईद
मो.न: 7869661222

Read More

Wednesday, May 3, 2017

माँ की बात उसके ख्यालों में गूँजी बेटा आज कल तेरी बीवी के लक्षण मुझे ठीक नहीं लगते घंटो कमरे का दरवाजा बंद करके पता नहीं किसके फोन पर लगी रहती है

Posted by Naeem

#एक_____तल्ख_____हकीकत

पत्नी गैर आदमी की तरफ कब और क्यों जाती है समाज की एक तल्ख हकीकत करवट बदल कर सांस बंद किए ही उसने तकिए के नीचे से फोन निकाला जो लगातार वाइब्रेट कर रहा था आंख खुली और फोन की स्क्रीन पर ब्लेंक करता हुआ जाना पहचाना नंबर देखकर उसको कोफ्त हुई उस वक्त उसे क्या मुसीबत पड़ी है कुछ बड़ बड़ाते  हुए उसने कॉल काट दी और मैसेज टाइप किया इस वक्त बात नहीं कर सकता "वह" साथ में सो रही है मैसेज सेंड करके वह जवाब का इंतजार करने लगा फोन की स्क्रीन लाइट जो आफ हो गई थी मैसेज रिप्लाई आने पर ऑन हो गई उसने जल्दी से मैसेज देखा और साथ ही अपने बिस्तर से उठ बैठा बिना कोई आवाज किए बिल्कुल धीरे धीरे वह बिस्तर से उठा और अंधेरे में ही चप्पल ढूंढने लगा चप्पल मिली तो उसने आगे बढ़कर धीरे से दरवाजा खोला बाहर की लाइट ऑन थी दरवाजा खुलते ही कमरे में हल्की सी रोशनी आई उसी रोशनी में उसने मुड़ कर पीछे देखा कि कहीं वह जाग तो नहीं गई हुई है पर जब बिस्तर पर नजर पड़ी तो बिस्तर खाली था कहां चली गई उसके दिमाग ने कई सवालों को जन्म दिया बाथरूम का दरवाजा भी खुला था इसी सोचो फिक्र में वह मुड़ कर  किचन की तरफ गया वहां की लाइट भी ऑफ थी अगले 10 मिनट में उसने अपने घर का पूरा कोना कोना छान मारा लेकिन उसका कुछ पता ना चला आवाज देकर पुकारने से अच्छा नहीं था इसलिए कि कहीं साथ वाले कमरे में सोई हुई मां की आंख ना खुल जाए हैरानी एकदम से परेशानी और गुस्से में बदल गई उसका फोन दोबारा वाइब्रेट करने लगा बड़ी बेदिली से कॉल काट कर वह इधर उधर देखने लगा सोच में ,माँ  की बात उसके ख्यालों में गूँजी बेटा आज कल तेरी बीवी के लक्षण मुझे ठीक नहीं लगते घंटो कमरे का दरवाजा बंद करके पता नहीं किसके फोन पर लगी रहती है अभी कुछ दिन पहले ही माँ  ने अपने शक का इजहार किया था लेकिन उसने उस बात पर ध्यान नहीं दिया कहीं छत पर ना हो दिमाग में सवालों का अंबार लिए वह सीढ़ी पर चढ़ने लगा अभी उसका  पैर आखरी सीढ़ी पर नहीं पड़ा था एक सरगोशी सुनकर वह वहीं रुक गया ,मैं उसकी बीवी तो बन गई लेकिन उसे मुझ में कोई दिलचस्पी नहीं है हमारे बीच जोर जबरदस्ती का रिश्ता चल रहा है जब पहली बार में उनके फोन में किसी लड़की के उल्टे पलटे मैसेज पढ़े तो बहुत "रोई" दिल किया उनसे कहूँ पर डर गई कि कहीं गुस्से में आकर हमारे रिश्ते बर्बाद ना हो जाए जब मैं सो जाती तो वह घंटो-घंटो किसी से फोन पर बातें करते रहते हैं मैं अपने आप को अंदर से खाती रही लेकिन कितनी देर बर्दाश्त करती कोई तो हो जो मेरे दिल की बात सुने पर जब से तुम मेरी जिंदगी में आए हो तो लगता है कोई अपना है जो परवाह करता है मैं जब भी परेशान होती हूं तो तुम्हें याद करती हूं तुमसे बात करके दिल का बोझ हल्का हो जाता है वह अगर अपने दिल की बातें किसी और से करते हैं तो मेरे दिल की बातें सुनने के लिए मेरे पास तो तुम हो ना छत पर   सरगोशियाँ अभी जारी थी लेकिन उसकी बर्दाश्त कम पड़ गई गैरत के समंदर में तूफ़ान उठा और उसने कदम आगे बढ़ाया कि आज तो उसे उस धोखे की सजा मिल कर ही रहेगी इतने में उसके फोन में फिर से वाइब्रेट करना शुरू किया सारे जज्बात एकदम ठंडे पड़ गए एक पल के लिए जैसे सब कुछ रुक सा गया हो जैसे किसी ने उसकी जबान जकड़ ली हो पैर आगे ना बढ़ सके और वह किसी हारे हुए खिलाड़ी की तरह वापस सीढ़िया उतरने लगा सरगोशियां अभी भी कानों में पढ़ती रहीं जो कलेजा छलनी करती रहे अपना फोन पावर ऑफ करके वह बिस्तर पर गिर गया आज तो आरामदायक बिस्तर भी कांटे की तरह चुभ रहे थे जिस गुनाह का वे मुजरिम था वह खुद उसका किया हुआ था किसी और को इस गुनाह की सजा कैसे  देता अगर तो कोई सजा वार अगर था तो वह खुद था कभी-कभी हम इस बात से अनजान होते हैं कि हम जो बोते हैं वही काटते हैं हमारी कोई छोटी सी एक गलती कैसे भयानक तूफान का पेश खेमा बन कर बनती है और कई घरों को खराब करके लड़ाई झगड़े का तलाक तक का कारण बनती है:

काश हम थोड़ा सा भी समझ लेते हालात को ???

Read More

Monday, May 1, 2017

हम सलाम करते हैं अब्दुल शकूर छीपा साहब के जज्बे को , आप भी दाद दें ऐसे लोगों को

Posted by Naeem
तस्वीर में आप जिस शख्स को देख रहे हैं ये कोई फकीर नहीं बल्कि सखावत का शहंशाह हैं जी हां इस शख्स का नाम अब्दुल शकूर छीपा हैं और ये पेशे से एक आम पत्थर का काम करने वाला दिहाडी मज़दूर हैं ये तस्वीरे मैंने खुद जोधपुर में अभी कुछ दिन पहले हुए माहे तैबा अवार्ड फंक्शन के बाद ली थी जिसमे इस शख्स को सम्मानित किया गया था। इस शख्स की सादगी देखिये प्लास्टिक की थैली में अवार्ड लिए जमीन पर बैठ नाश्ता कर रहा हैं जबकि इसने वो किया जो बड़े बड़े करोड़पति नहीं करते।
इन्होंने अपनी मां नसीबन को हज करवाने के लिए पैसा जमा किया था लेकिन कुदरत को ये मंजूर नही था और एक बड़ी बीमारी की वजह से वो चल बसी। शकूर ने अपनी खाली पड़ी ज़मीन को मां की याद में अस्पताल के लिए दान कर दिया। उनका कहना है कि जिन ग़रीब मरीज़ों को इलाज के लिए रूपये नसीब नहीं होते हैं उनको मां की याद में बनाई हुई डिस्पेंसरी में चिकित्सा उपलब्ध होगी तो मां को कब्र में सवाब और मग़फिरत का ज़रिया समझूंगा। उनकी दान की गई ज़मीन पर सरकारी सहयोग से आज डिस्पेंसरी खड़ी है और ग़रीबों का निशुल्क इलाज हो रहा है।
फटे पुराने कपड़ों में मजदूरी करने वाले शकूर ने पिछले दिनों अपनी दो ज़मीनें मस्जिद और समाज के भवन व मदरसे के लिए भी दान कर दी हैं इसके अलावा ये एक जमीन को सरकारी लैबोरेटरी के लिए देना चाहते हैं।
मजदूर दिवस पर मजदूर अब्दुल शकूर को लख लख सलाम
मित्रों का पोस्ट

आसाम : गाय चोरी को लेकर दो मुस्लिम युवको की हत्या
बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल ने दोस्तों संग की बीफ पार्टी, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इन तस्वीरों से समझिये कि आपको हेलमेट क्यों लगाना चाहिए
हॉर्न बजाने से डरी गाय, गुस्साये गाय मालिक ने फोड़ डाली ड्राइवर की एक आँख
Read More

Friday, April 28, 2017

अब किसी भी प्रकार के टीवी डिबेट का बायकाॅट करेंगे मुस्लिम उलेमा

Posted by Unknown

"दारुल उलुम देवबंद का सराहनीय कदम"

दारुल उलुम देवबंद ने एक प्रेस नोट जारी कर मुस्लिम उलामाओं से मीडिया का पूरे तरीके से बायकाट करने की अपील की है, यह एक बेहद सराहनीय कदम है कयोंकि टीवी डिबेट में बैठे एंकर और नास्तिकता, फेमिनिज्म और लिब्रिज्म से लबरेज इंसान किसी भी उलामा को पुरी तरीके से अपनी बातों को सामने रखने नहीं देते हैं, जिससे वो इस्लाम की सही तस्वीर पेश नहीं कर पाते और लोगों के मन में इस्लाम के प्रति गलत धारणा पैदा होती है, इसके साथ-साथ उन मौलाना को भी रोका जा सकता है जो चंद पैसों के खातिर ऐसे डिबेट में शामिल होते हैं, लोगों को ये भी समझना होगा की इस्लाम को कुआन ओ अहादीस से जानना और समझना होगा नाकी टीवी डिबेट में उलेमाओं के दुसरी जानिब बैठे नास्तिकों से।

ऐसे टीवी डिबेट में आपको अक्सर ये लोग नजर आएंगे जो इस्लाम और इस्लामी कवानीन को गलत ढंग से पेश करते हैं।

तारिक़ फ़तेह:- इस शख्स का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं। यह घोषित रुप से मानसिक रोगी या नास्तिक है जो की इस्लाम से खारिज ही कहलाएगा। अपने कारनामो की वजह से ये पाकिस्तान से भागकर कनाडा में रह रहा था, ना ये अपने मुल्क का हुआ और न उन मुल्कों का जिन्होंने इसे आसरा दिया, ये इंडियन मीडिया का चहेता मुस्लिम चेहरा है। तारिक फ़तेह जो कि पाकिस्तानी है और वह पाकिस्तान से अपनी रंजिश की वजह से मुसलमानों और पाकिस्तान को गालियां देता है इस लिये वह भारतीय फासिस्ट मीडिया का फ़ेवोरेट चेहरा है। यह शख्स हज़रत उमर र.अ से लेकर अम्मी आएशा र.अ की शान में गुस्ताखी कर चुका है।

सलमान रुश्दी:- इसकी अय्याशीओ को दुनिया जानती है और उसकी इस्लाम पे की गई गुस्ताख़िओ की वजह से उसको महरूम हज़रत अयातुल्लाह खुमैनी ने मौत का फतवा सुनाया था, यह शख्स भी इंडियन मीडिया का हीरो रहा है।

तस्लीमा नसरीन:– जिसको बांग्लादेश से निकाल दिया गया और जो मर्दो को अपनी किताबो में कुत्त* और अपनी ज़िन्दिगी में सिर्फ सेक्स करने की चीज़ मानती है, जिसकी लिखी गई किताबें अपनी अश्लीलता की वजह से जानी जाती है और इन्ही वजहों से उसको इस्लाम से खारिज किया जा चूका है, यह औरत मुसलमानों और इस्लाम मज़हब को गलियां देने का कोई मौका नही छोड़ती है, जिसकी वजह से यह इंडियन मीडिया की चहिती बनी रही है।

ऐसे ही कई चेहरे रहे हैं जो टीवी चैनलों पर इस्लाम और शरियत पर छींटाकसी करते नजर आते हैं और एंकर की शातिराना चाल से सामने बैठे उलेमाओं को बोलने का मौका नहीं दिया जाता है, इसलिए खैर मकदम किजिए दारुल उलुम के इस फैसले का जिसके बाद टीवी चैनलों का वो धंधा चौपट हो सकता है जो उन्होंने इस्लाम को बदनाम करके खड़ा किया है।

अशरफ हुसैन

Read More

Tuesday, April 25, 2017

देवर ने बलात्कार करने के बाद मारने की कोशिश की तो हिन्दू महिला का सुरक्षा कवच बना ‘बुर्का’

Posted by Naeem

देवर ने बलात्कार करने के बाद मारने की कोशिश की तो हिन्दू महिला का सुरक्षा कवच बन ‘बुर्का’
  
शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक महिला की जान बचाने के लिए इस्लामिक लिबास ‘बुर्का’ उसका सुरक्षा कवच बना हुआ है
दरअसल, जलालाबाद थाना क्षेत्र के खाई खेड़ा गांव के प्रेम चंद्र से 35 वर्षीय महिला नीलम की शादी हुई थी. इस शादी से नीलम के दो बच्चे हैं. 6 साल पहले बीमारी के चलते उसके पति की मौत हो गई. पीड़िता के अनुसार उसके पति के नाम पर बीस बीघा जमीन हैं. जिस पर उसका पति खेती करता था।
पीडिता के अनुसार, इस जमीन पर पति की मौत के बाद से ही उसके ससुराल वालों ने कब्ज़ा जमा रखा हैं. इसके लिए उसके सास-ससुर ने उसके देवर के साथ शादी का झांसा दिया. जिसके बाद उसका देवर उसके साथ जबरन दुष्कर्म करता रहा. पीड़िता ने विरोध किया तो बच्चों को भी जान से मारने की धमकी दी और उसके साथ मारपीट की।
पीड़िता ने देवर सहित पुरे ससुराल वालों के खिलाफ पुलिस के पास शिकायत की हुई हैं. तीन महीने का वक्त गुजर जाने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई कारवाई नहीं हुई. उल्टा अब महिला को जान से मारने की धमकी भी मिल रही है. पीड़िता को अब अपनी जान बचाने के लिए बुर्के में रहना पड़ रहा हैं,
पर्दा औरत को पूरी तरह से सुरक्षित रखता है अब पर्दे पर इस्लाम दुश्मनी में अंधे होकर लोग विरोध करें तो इसे मानसिक संतुलन खराब ही कहा जा सकता है।

(सोर्स वायरल नियुज इन इंडिया)

Read More

Monday, April 24, 2017

फिर एक मुस्लिमां ने अमेरिका को झुकने पर मजबूर कर दिया,मामला एक 16 साल की अमेरिकन मुस्लिम मुक्केबाज़ अमया ज़फ़र से जुड़ा

Posted by Naeem

आप नक़ाब मे रहो दुनिया औक़ात मे रहेगी,आप हक़ पर रहो दुनिया बेशक झुकेगी,मौजूदा दौर मे जबकि लगभग सारी दुनिया मे किसी ना किसी  तरीके से इस्लाम,शरियत और हिजाब को कहीं ना कहीं निशाना बनाया जा रहा है और खुद को लिबरल कहने वाली कई मुस्लिम महिलाएं भी इस्लाम विरोधी ताकतों की साजिशों मे फंस कर इस्लाम के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही वही अमेरिका जैसे एक अत्याधुनिक मुल्क मे एक फिर एक मुस्लिमां ने यूएस को झुकने पर मजबूर कर दिया,मामला एक 16  साल की अमेरिकन मुस्लिम मुक्केबाज़ अमया ज़फ़र से जुड़ा है,जिन्हें पहले रिंग या हिजाब मे किसी को चुनने के लिए कहा गया था लेकिन अमाया की ज़िद थी की वो रिंग मे हिजाब पहन कर ही जायेंगी,क्यों कि वो हक़ पर थी और सुपर पावर अमेरिका को भी झुकना पड़ा और उन्हें मुक्केबाज़ी के दौरान हिजाब पहनने और अपने हाथ, पैर को पूरी तरह ढकने का अधिकार हासिल हो गया है एक खबर के अनुसार इस छूट के बाद अमाया अपने धार्मिक मान्यताओं को पूरा कर सकती हैं और उनके लिए बिना बांह की जर्सी और घुटने से उपर तक की जर्सी पहनना अनिवार्य नहीं होगा,उम्मीद है अमाया 2020 मे टोक्यो मे होने वाले ओलिंपिक के लिए ये अधिकार प्राप्त कर सकेंगी,आप को बता दें की पिछले साल अमेरिका मे ही महिला तलवारबाज़ इबत्जाब मोहम्मद ने भी काफी मशक्कत के बाद हिजाब पहन कर खेलने का अधिकार हासिल कर लिया था,ये घटना सबक़ है उन मुल्को के लिए जो अमेरिका के नक्शे कदम पर चलना चाहते है और वहां की आज़ादी की दुहाई देते नही थकते और खुद दूसरे धर्मो मे बदलाव चाहते है तलाक और हिजाब को लेकर,और ये तमाचा है उन औरतों पर भी जिन्हें घरैलू ज़िंदगी मे ही हिजाब बोझ लग रहा है।

शोएब गाज़ी

Read More

Tuesday, March 28, 2017

एक दर्द नाक घटना पढ़ें नई दुनिया खोजने की ख्वाहिश दिल में लिए वह जवानी की तरफ बढ़ रहा था

Posted by Naeem

आरिफ 14 से 15 साल का एक मासूम नौजवान था नई दुनिया खोजने की ख्वाहिश दिल में लिए वह जवानी की तरफ बढ़ रहा था बाप का लाडला था इसलिए अक्सर मांगे जिद किए बगैर पूरी हो जाती है मां बाप का लाडला था इसलिए कुछ भी मांग लेता था कुछ दिन से वह अपने बाप से नया मोबाइल फोन लेने की जिद कर रहा था बाप पहले तो टालता रहा फिर किसी न किसी तरह उसने मोबाइल दिला दिया आरिफ मोबाइल लेकर बहुत खुश था कुछ दिन तो वह गाने वगैरह सुनता गेम खेलता रहा फिर एक दिन उसके हाथ एक SIM लग गई ,अब उसका ज्यादातर वक्त लोगों को कॉल करके तंग करने में गुजरता था एक दिन राँग नंबर डायल करते ही एक नंबर पर कॉल लग गई जो कॉल किसी लड़की नहीं उठाई उस लड़की से 2से4 दफा बात होने के बाद उनमें दोस्ती हो गई और फिर दोनों अक्सर लंबी लंबी बातें करने लगे मोबाइल कंपनी की तरफ से बहुत सारे पैकेज की शक्ल में कुछ पैसों में घंटो-घंटो पूरी पूरी रात बात करने की सहूलत है इस पैकेज ने उनका काम और आसान कर दिया और वह थोड़े से पैसों में कई कई घंटे बात कर लेते एक दिन शाम को मगरिब के बाद आरिफ घर बैठा था की उसी लड़की की काल आगई बाप घर पर था इसलिए वहां बात करना मुमकिन नहीं था तो आरिफ ने हेडफोन कानों में लगाये और बाहर निकल गया रात का अंधेरा छाना शुरू हो गया था वह किसी की दखल अंदाजी से बचने के लिए अपने घर से थोड़ी दूर गुजरती रेलवे लाइन पर चला गया और वहां बैठ कर आराम से बातें करने लगा हेडफोन कानों में लगाए वह बातों में इतना बिजी था कि उसे यह ख्याल ना रहा कि वह कहां बैठा है और क्या वक्त हो गया है और उसी वक्त वहां से एक ट्रेन गुजरती है थोड़ी देर बाद उसके पीछे में उसी पटरी पर आती दिखाई दी ट्रेन, ड्राइवर ने देखा कि कोई उसकी तरफ पीठ किए पटरी पर चल रहा है उसने हॉर्न पर हॉर्न बजाया लेकिन आरिफ लड़की से बात करने में इतना मगन था कि उसे हॉर्न सुनाई ना दिया ना ही उस ट्रेन की दूर से पड़ने वाली लाइट दिखाई दी और फिर वही हुआ जिसके बारे में शायद किसी ने सोचा भी न था ट्रेन पूरी रफ्तार से आकर उस से टकराई और फिर चंद सेकंड में वहां आरिफ की खून में डूबी लाश पड़ी थी हाथ में मोबाइल फोन सख्ती से पकड़ा हुआ था लेकिन मोबाइल पर बात करने वाला इस दुनिया में नहीं रहा , यह खबर सुनते ही आरिफ की माँ के होशो हवास खो गए थे और बाप हमेशा के लिए इस पछतावे का शिकार हुआ कि उसने अपने बेटे की ख्वाहिश तो पूरी कर दी लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया यह एक सच्चा वाक्या  है जो चंद दिन पहले हमारे एक दोस्त के घर के पास पेश आया मां बाप का एकलौता बेटा आरिफ जरा सी लापरवाही से अपनी जान से हाथ धो बैठा यकीनन उसकी मौत उसी जगह लिखी थी इसलिए जो हुआ वह मुकद्दर था लेकिन क्या वाकई इस मामले में किसी का भी कोई कसूर नहीं है क्या उन मां बाप का कसूर नहीं जो अपनी औलाद की बेजा ख्वाहिश को भी पूरा करते हैं चाहे वह उनके लिए नुकसानदेह ही क्यों ना हो बच्चा अगर आग मांग ले तो क्या मां-बाप उसे आग लाकर दे देंगे क्या बच्चों की ख्वाहिश  पूरी कर देने के बाद मां-बाप की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है उनकी अच्छाई बुराई की तालीम देना सही गलत चीज की तरफ रहनुमाई करना और उनकी निगरानी करना क्या मां-बाप की जिम्मेदारी नहीं क्या हमारी मोबाइल कंपनी उसकी मौत के जिम्मेदार नहीं है जो अपने नफा के लिए नौजवान नस्ल को चंद रुपयों में घंटो-घंटो बातें करने का ऑफर देकर बर्बाद करती हैं क्या वह हुकूमत जिम्मेदार नहीं जिसने इस बुराई की तरफ से निगाहें फेर रखी है और उस कंपनी को खुली छूट दे रखी है क्या इन सबसे बढ़कर नौजवान लड़के लड़कियां जिम्मेदार नहीं हैं जो अपने मां-बाप की आंखों में धूल झोंककर उन के भरोसे का खून करके अपने कीमती वक्त इस तरह के फालतू फजूल कामों में बर्बाद कर रहे हैं और अपने खानदान की इज्जत को दाव पर लगा रहे हैं आरिफ तो अपने मां-बाप को सारी जिंदगी का दुख देकर इस दुनिया से चला गया लेकिन ना जाने कितने मां बाप अपने बच्चों की वजह से इस दुख का शिकार हुए होंगे और होते रहेंगे कितनी लड़कियां अपनी गलती की वजह से मां बाप की इज्जत का जनाजा निकाल कर रोज मरती होंगी क्या इसका कोई इलाज है कोई है जो इस तरफ ध्यान दे।

Read More

Monday, March 27, 2017

बीवी है गुलाम नहीं इज्ज़त करना फर्ज है

Posted by Naeem

वह औरत जिसे सारा दिन फारिग रहने के ताने मिलते हैं मैंने उसे 4 माह का बेटा ले लिया और उसको उसके मायके छोड़ आया दरअसल मैं घर वालों को के रोज-रोज के तानों से तंग आ चुका था तुम्हारी बीवी कोई काम नहीं करती तुम्हारी बीवी कोई काम नहीं करती मुझे भी ऐसा ही लगा था आखिर तुम क्या करती हो सारा दिन  , बर्तन कपड़े घर की सफाई तो कामवाली कर जाती है लेटी ही रहती हो उसके जाने के बाद आज मेरी पहली रात का आगाज था मेरे पहलू में कोई मुझे अपनी शरारतों से हंसाने वाला नहीं था हां मेरा बेटा जरूर था जिसे मैंने अभी-अभी फीडर दे कर सुलाया था आप समझे नहीं दूध पिलाने से लेकर बच्चे को सुलाने तक मुझे क्या-क्या करना पड़ा मैं तफ़सील से बताना चाहता हूं मैं उठा और किचन में गया
फिडर को साबुन से धो कर मैंने चूल्हे पर पानी चढ़ाया फिर दूध बनाने के लिए पानी गर्म किया और उसमें पाउडर डाला तब कहीं जाकर एक फीडर तैयार हुआ दूध पिलाने के बाद मैं उसे कंधे से लगाकर थपकियां देता रहा ताकि दूध हजम हो सके फिर उसका पैम्पर बदला बदलने के बाद उसे लेटाया तो मालूम हुआ कि बच्चे ने पाखाना किया हुआ है उसे बाथरूम ले जाकर साफ करके वापस आया तो उसने दूध की उल्टी कर दी मैं जल्दी से रूमाल उठाने को लपका खैर उसको पैप्मर दोबारा लगाया और बाजू में झूला झूलाकर सुलाने लगा दूध उबालकर उसे ठंडा किया और फ्रिज में रख दिया वह होती तो मिल्क शेक बनाकर मेरे हाथ में थमा देती लेकिन अब इतने झमेलों में कौन पड़े अभी अपनी रोटी पका कर खा लूंगा लेकिन आटा अभी तो वह गूंधना पड़ेगा शुक्र है सालन तो पक्का पड़ा है बस कटोरी में डाल कर माइक्रोवेव ऑन करना है मैं जरा बेड से बिखरा हुआ सामान उठा लूँ सब को सही जगह पर रख दूं और फिर रोटी खा लूं नहीं नहीं सुबह ऑफिस जाने के लिए कपड़े भी तो प्रेस करने हैं मैं लगा कपड़ा प्रेस करने अभी शर्ट प्रेस की ही थी कि बेटा रोने लगा अबकी बार मैंने उसको झूले में डाला और झूला झुलाने लगा भूख से मेरा बुरा हाल था कैसा भी  अल्लाह  अल्लाह करके बच्चे को सुलाया और एक रेस्टोरेंट पर कॉल करके खाना मंगाया आधे घंटे में खाना मेरे सामने था मैंने बड़े-बड़े
नवालों में खाना खत्म कर दिया क्योंकि मैं जानता था अगर बेटा दोबारा जाग उठा तो खाना पड़ा रह जाएगा फिर दोबारा गर्म करने के लिए भी टाइम चाहिए और मसक्कत भी मुझे उकताहट होने लगी घड़ी 11:00 बजा रही थी मैं बिस्तर पर ढह सा गया,
बीवी का नाम लेकर बोला चादर अलमारी से निकाल दो मैं ओढ़ कर सोना चाह रहा हूं लेकिन नहीं अब खुद ही उठकर लेनी पड़ेगी चादर अभी मैं यह सोच ही रहा था कि इनवर्टर भी जवाब दे गया पंखा बंद हो गया इससे पहले कि गर्मी की वजह से मेरा बेटा जाग जाता और चिल्लाने लगता मैंने बेड से छलांग लगाई और झट से हाथ वाला पंखा अलमारी से निकाल लाया मैं उसको पंखा झलने लगा और साथ-साथ नींद की शिद्दत से खुद भी झूलने लगा 12:00 बजे बिजली आई और मैं फौरन ही सो गया 2:00 बजे बेटे के रोने की आवाज से मेरी आंख खुल गई अचानक गहरी नींद से जागने पर मेरे सर में दर्द होने लगा उसे भूख लगी हुई थी मैं सुस्ती से उठा और उसे डब्बे का दूध बनाकर पिलाया 2:30 बजे के करीब बेटा सो गया और मैं भी उसके बाद बेटा कब जागा और कब तक रोता रहा मुझे नहीं पता अलबत्ता जब सुबह 8:00 बजे आंख खुली तो वह रो ही रहा था और उसके पेंपर से बदबू आ रही थी पूरी बेडशीट खराब हो चुकी थी जल्दी से उठा पेम्पर बदला दूध पिलाया बेडशीट को धोया और यह धुली हुई बेडशीट बिछाई सवा 9:00 बज चुके थे नाश्ते में जो मैं दही खाता था वह मेरी बीवी घर में बना लेती थी पता नहीं किस वक्त बनाती थी मैंने चाय बनाने की गरज से थोड़ा दूध उंडेला और सोचने लगा कौन सा वक्त था जब मेरी बीवी मसरूफ नहीं होती थी मेरी ख़िदमत में भी कोई कमी नहीं आने देती घर में सिर्फ वही तीन काम तो नहीं थे जिनके लिए मैंने नौकरानी रखी थी एक बच्चे को संभालना ही काफी था उसको थकान से चूर करने के लिए लेकिन वह मुझे वक्त पर खाना देती मैं थक जाता तो मुझे दबाती मैं उदास होता तो मुझे हंसाती और मेरी दिलजोई  करती मैं काम के सिलसिले में उलझ जाता तो मेरी कशमकश में मेरा साथ देती मेरा हौसला बढ़ाती मैं सोचो मैं गुम था दूध उबलकर सेल्फ पर आ चुका था मैं आहिस्ता-आहिस्ता सेल्फ पर कपड़ा लगाने लगा तुम करती क्या हो सारा दिन वाह तुम्हारा जिस्म क्यों दर्द करने लगा कौन सा पहाड़ ढहाया है तुमने और वह पहलू बदल लेती है शायद मेरे तंज भरे शब्दों से अकेले में आंसू बहाती होगी पर मैं जालिम इंसान ने परवाह नहीं की कभी कुछ देर बाद खुद ही साइड बदलकर मेरे चेहरे पर झुक जाती आई लव यू  कहती तो मैं जवाब में मुस्कुरा देता और वह इसरार करने लगती नहीं आप आई लव यू तो बोलें मुझे :
Fikr-e Millat

Read More