Friday, February 17, 2017

जब एक कश्मीरी मुस्लिम लड़के ने सिख लड़की को बचाने के लिए आग में छलांग लगा दी

Posted by Unknown

14 फ़रवरी:
श्रीनगर के महजुर नगर इलाके से ऑटो ड्राईवर अहमद रेशी दोपहर में खाना खाने पहुंचे ही थे की पड़ोस में चीखने चिल्लाने की आवाज सुनाई देने लगी। बाहर आकर देखा तो पड़ोस के एक सिख परिवार के घर से आग की लपटें निकल रही थी।
रेशी उस आग लगे हुए  तिन मंजिला घर के तरफ बढ़े और पास जाकर देखा तो लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ है। घर के मालिक दर्शन सिंह दहाड़े मार मार कर रो रहे थे क्योंकि घर के भीतर आग में उनकी बेटी रौशनी फंसी हुयी थी।
रौशनी जो की हाल ही में कश्मीर यूनिवर्सिटी से MBA करके घर आई हुयी थी। वो बॉथरूम में नहाने गयी की इधर शार्ट सर्किट से आग लग गया।
45 मिनट हो चुके थे दमकल अभी तक नही पहुंचा था। मौके पर पहुंचे हुए लोग आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे पर आग घर के बड़े हिस्से में लग चुकी थी जिसे आसानी से बुझाना मुश्किल था।
अब तक रेशी, मुहम्मद अहमद और उनके बुजुर्ग पिता अब्दुल खालिक मुकामी लोगों के मदद से घर के अंदर जाने का रास्ता बना चुके थे।
रेशी ने ला इलाह इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलल्लाह पढ़कर आग के अंदर छलांग लगा दी और रौशनी तक जा पहुंचे। रौशनी अंदर फर्श पर बेहोश पड़ी थी उसे उठाकर बाहर लाया और तुरंत हॉस्पिटल के लिए रवाना हो गए।
रास्ते में हद से जादा ट्रैफिक पड़ने के वजह से रौशनी ने दम तोड़ दी और हॉस्पिटल पहुंच कर डॉक्टर ने भी उसे मृत घोषित कर दिया।
सिख धर्म के रिवाज के मुताबिक जब तक  मरने वाले का अंतिम संस्कार नही हो जाता तब तक उसके घर वाले कुछ नही खाते। रौशनी की दो बहनें चंडीगढ़ रहती हैं जिसके वजह से उन्हें आने में काफी टाइम लगता।
पड़ोस के हाजी खालिक बताते हैं की हमने रौशनी को बचाने की पूरी कोशिश की पर बचा नही पाये जिसके वजह से हमने भी तय किया है की जबतक रौशनी का अंतिम संस्कार नही हो जाता हम लोग भी कुछ नही खाएंगे।
रौशनी के चाचा दलजीत सिंह कहते हैं की हम सिख मुसलमान सालों से प्यार मुहब्बत से रहते हैं यहां साम्प्रदायिकता जैसी कोई चीज नही है ।

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