2300 टन खाद्य व् दवा सामग्री लेकर मलेशिया का जहाज़
रोहिंया मुसलमानो की मदद के लिए म्यांमार पहुँच गया
लेकिन वहा भी उसे बुद्धिस्ट संगठन का विरोध झेलना पड़ा।
स्वस्थ सेवक और कार्यकर्ता तिलवा पोर्ट के नॉटिकल
आलिया डॉक पर बृहस्पतिवार को पहुँचे। उनके साथ खाना ,
दवाइयां और कपडे थे। जहाज़ द्वारा मदद भेजने वाले
आयोजको ने कहा कि वह म्यांमार सरकार पर पूरा भरोसा
रखते है कि यह मदद ज़रूरतमंदों तक पहुचाई जाएगी।
मदद भेजने वाला संघटन 1पटेरा क्लब के राजाली रमली ने कहा
: " हम म्यांमार की संप्रभुता का सम्मान करते है और हमने मदद
साफ़ नियत के साथ म्यांमार सरकार को सौंप दी "
म्यांमार के सामाजिक कल्याण मंत्री भी वही मौजूद थे।
डॉक एरिया के बाहर दर्जनों बुद्धिस्ट हाथो में बैनर लेकर इस
मदद का विरोध कर रहे थे जिसमे लिखा था " नो रोहिंग्या "
राष्ट्रवादी म्यांमार मॉन्क्स यूनियन से जुड़े वक्ता ठुसैतता
नामक एक बौद्ध ने बताया : " हम उनको यह बताना चाहते है
कि यहाँ कोई रोहिंग्या नहीं है।"
विदित हो म्यांमार सरकार रोहिंग्या मुसलमानो को
नागरिकता नहीं देती है बावजूद इसके कि वह हज़ार सालो से
राखिन प्रांत में रह रहे है। पिछले कुछ वर्षो में रोहिंग्या
समुदाय के साथ दर्जनों हिंसक वारदाते हो चुकी है जिनमे लूट,
हत्या, बलात्कार और आगजनी आम है। यूनाइटेड नेशनने भी
रोहंग्या समुदाय को "सबसे ज़्यादा दुर्व्यवहार झेल चुकी
माइनॉरिटी" की संज्ञा दी है।
Friday, February 10, 2017
रोहिंग्या मुस्लिमों के मदद के लिए मलेशिया का जहाज 2300 सामान लेकर पहुंचा
Posted by UnknownAbout Admin of the Blog:
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