आज हमारा हाल भी इस चोर के जैसा है जो लोगों के ऐब तो ढूंढता फिर रहा है मगर कभी अपने गिरेबान में झांक कर नहीं देखता हमारी यह आदत बन चुकी है हमेशा दूसरों की गलतियां ही ढूंढते रहते हैं कभी अपने को नहीं आईने में देखते हैं अपने ऊपर नजर नहीं दौड़ाते हैं आखिर हम क्या थे क्या हो गए हैं कहां से कहां आ गए हमारे हालत की असल जिम्मेदारों में से एक यह भी है___???
Tuesday, January 10, 2017
हम फिर भी सबक नहीं सीखते
Posted by Naeem in: Naeem Akhter
एक सोनार कारोबार के सिलसिले में किसी दूसरे शहर गया ,उसके पास काफी मोती थे उसने वह मोती एक मजलिस में खोला और सब को दिखाने लगा उसने एक मोती जेब में से निकाला और लोगों को दिखाते हुए बोला यह मोती शब अफरोज है रात को चमकता है जब उसने सामान समेटा और उठ कर जाने लगा तो एक चोर जो उसी महफिल में बैठा हुआ था उसने कहा जनाब आप कहां जा रहे हैं सोनार ने जवाब दिया ने कहा मैं फलाँ शहर जा रहा हूँ चोर ने कहा मैं भी उसी शहर में जा रहा हूं चलो हम साथ चलते हैं अभी सोनार भी समझ गया था कि यह मेरा हमसफ़र नहीं है यह मोती के लिए मेरे साथ जा रहा है लेकिन सोनार समझदार था उसने कहा आओ चलते हैं दोनों मिलकर चल पड़े सारा दिन चलते रहे रात को एक जगह ठहरे जब सोने लगे तो चोर ने अपनी जैकेट पैंट शर्ट वगैरह सब उतार कर एक जगह टांग दिया , सोनार ने अपनी जेब से कीमती मोती निकाला और नजर बचाकर उसके जेब में रख दिया और खुद बेफिक्र होकर सो गया, चोर रात को उठा और उसकी जेब उसका सामान सब तलाश करने लगा कहीं भी कीमती मोती ना मिला आखिर चोर थक हार कर सो गया ,सुबह उठते ही सोनार ने नजर बचाकर कीमती मोती उसकी जेब से निकालकर अपनी जेब में रख लिया जब चोर उठा तो नाश्ता करते हुए सोनार से बातों बातों में पूछा कि तुम्हारे पास जो कीमती मोती था वह क्या हुआ और रात चमक नहीं रहा था सोनार ने जेब से मोती निकाला और दिखाकर कहा यह तो मेरे पास है, चोर हैरान हो गया मैंने उसकी पूरी जेब छान मारी लेकिन मुझे यह मोती ना मिला उसने अभी जेब से निकाल कर दिखाया फिर आज रात निकाल लूंगा सोनार ने अगली रात फिर वही तरीका अपनाया इधर चोर पूरी रात ढूंढता रहा उसे कुछ ना मिला सुबह को नाश्ते पर फिर वही किस्सा हुआ यही काम तीन से चार दिन चलता रहा आखिर चोर ने एक सुबह सोनार से कहा कि मैं आपका साथी नहीं आपका हमसफ़र नहीं हूं मैं आपके साथ इस मोती के लिए आया था आज मैं आपको अपना गुरु मानता हूं , आप मोती कहां रखते हैं यह मुझे बता दें उसने कहा मियां तुम औरों की जेब तलाश करता रहा कभी अपनी जेब में हाथ नहीं डाला:
आज हमारा हाल भी इस चोर के जैसा है जो लोगों के ऐब तो ढूंढता फिर रहा है मगर कभी अपने गिरेबान में झांक कर नहीं देखता हमारी यह आदत बन चुकी है हमेशा दूसरों की गलतियां ही ढूंढते रहते हैं कभी अपने को नहीं आईने में देखते हैं अपने ऊपर नजर नहीं दौड़ाते हैं आखिर हम क्या थे क्या हो गए हैं कहां से कहां आ गए हमारे हालत की असल जिम्मेदारों में से एक यह भी है___???
आज हमारा हाल भी इस चोर के जैसा है जो लोगों के ऐब तो ढूंढता फिर रहा है मगर कभी अपने गिरेबान में झांक कर नहीं देखता हमारी यह आदत बन चुकी है हमेशा दूसरों की गलतियां ही ढूंढते रहते हैं कभी अपने को नहीं आईने में देखते हैं अपने ऊपर नजर नहीं दौड़ाते हैं आखिर हम क्या थे क्या हो गए हैं कहां से कहां आ गए हमारे हालत की असल जिम्मेदारों में से एक यह भी है___???
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